सीएसआईआर- केंद्रीय विद्युतरसायन अनुसंधान संस्थान
(विद्युतरसायन के क्षेत्र में एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्थान)
सीएसआईआर - सीईसीआरआई के बारे में 

व्यक्तियों से समुदायों का निर्माण हो सकता है , परन्तु राष्ट्र का निर्माण केवल संस्थानों से ही संभव है.
- Benjamin Disraeli  

दिनांक 25 जुलाई 1948 सुदूर तमिलनाडु के छोटे से गांव में त्यौहार का माहौल था. अवसथा भारतीय विज्ञान के एक नए अध्याय के प्रारंभ का. एक लाख से भी अधिक लोगों की भीड़ इस अवसर की साक्षी बनने के लिए उपस्थिति थी. यही वो दिन था जब सीएसआईआर, केंद्रीय विद्युत रसायन अनुसंधान संस्थान की कारैकुडी में स्थापना की गई. यह संस्थान अलगप्पा चेट्टियार, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा डॉक्टर शांति स्वरूप भटनागर के राष्ट्र को समर्पित प्रयासों का परिणाम है. पांच वर्ष बाद जनवरी 14,  1953 को यह स्वप्न साकार हुआ जब डॉक्टर एस राधाकृष्णन  ने इस संस्थान कोसीएसआईआर की 12 वीं राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया.

 संस्थान की नींव रखते समय पंडित नेहरू ने कहा इस प्रकार के प्रतिष्ठानों की स्थापनाi तथा विज्ञान को लोगों के कल्याण में लगा कर ही हम समूचे राष्ट्र का विकास कर सकते हैं.  आज सीएसआईआर- सीईआरआई परिवार में  कुल 700 सदस्य हैं. इनमें से 120 वैज्ञानिक है. यह संस्थान दक्षिण एशिया में विद्युत रसायन अनुसंधान का एक  विख्यात एवं बड़ा अनुसंधान संस्थान है.  750 पेटेंट, 250 प्रोसेस, 600 प्रायोजित तथा अनुदान प्राप्त परियोजनाएं, 450 लाइसेंस, 5500 अनुसंधान एवं समीक्षात्मक लेख के साथ यह संस्थान राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका की पुष्टि करता है . 
 स्वाभाविक रूप से सच्चाई यह है  की श्री अलगप्पा चेट्टियार  द्वारा केवल विद्युत रसायन को समर्पित एक राष्ट्रीय प्रयोगशालाt की स्थापनाi हेतु वर्ष 1948 में 300 एकड़ भूमि तथा 1500000 रुपए   नकद देने  का महान  एवं अद्वित्तीय कार्य करने का  एक पहलूह यह भी था कि उस  समय विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में विद्युत् रसायन को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था. इसलिए इस महान द्रष्टाकी दूरदृष्टि तथा परोपकार को  अनदेखा नहीं किया जा सकता. सीएसआईआर-सीईईआरआई का मुख्यालय कारेकुडी  में है  तथा चेन्नई मंडपम एवं तूतीकोरिन में इसके विस्तार केंद्र हैं.